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24/11/2014  
सर्व शिक्षा अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन में हिमाचल अव्वल
 
 

प्रारम्भिक स्तर पर गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने प्रभावी पग उठाए हैं। गुणात्मक शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है।  हिमाचल देश के गिने-चुने राज्यों में से एक है, जहां प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को हासिल किया गया है और अब, प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश, सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में एक है। प्रदेश में जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम के प्रयासों की पूर्ति के लिये सर्व शिक्षा अभियान को शुरू किया गया था। इसके माध्यम से सभी बच्चों में मानवीय क्षमताओं में निखार लाने का अवसर प्रदान करने की कोशिश भी की गई है।
सर्व शिक्षा अभियान एक निश्चित समयवाधि के भीतर प्राथमिक तथा अपर प्राथमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा सुनिश्चित बनाने पर केन्द्रित कार्यक्रम है।
गुणात्मक शिक्षा में सुधार की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भारत सरकार ने भी प्रशंसा की है। वर्ष 2013-14 में पहली से आठवीं कक्षा तक की उपलब्धियों को लेकर किए गए सर्वेक्षण में मानव संसाधन मंत्रालय ने प्रदेश की पीठ थपथपाई है। हिमाचल प्रदेश में सर्व शिक्षा अभियान द्वारा किए गए आंकलन सर्वेक्षण के आधार पर एक स्वतन्त्र एजेन्सी स्कौच ने प्रदेश को स्कौच ऑर्डर ऑफ मेरिट- भारत की उत्कृष्ट शासन परियोजना-2014 से सम्मानित किया है।
हिमाचल प्रदेश में सर्व शिक्षा अभियान के सफल कार्यान्वयन के सार्थक परिणाम सामने आये हैं। प्रारम्भिक शिक्षा के लिये मिश्रित शैक्षणिक विकास सूची में प्रदेश 12वें से चैथे स्थान पर पहुंच गया है। यह सब प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के प्रत्येक भाग में शिक्षण संस्थान खोलने तथा शिक्षा जैसे बृहद क्षेत्र के लिये समुचित बजट का प्रावधान करने का प्रतिफल है।
इस वित्त वर्ष के दौरान शिक्षा पर 4,282 करोड़ रूपये खर्च किये जा रहे हैं, जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में सर्वाधिक हैं। वर्ष 2014-15 के दौरान एसएसए के लिये 250 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो गत वित्त वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है। एसएसए के माध्यम से राजकीय पाठशालाओं में अधोसंरचना विकास पर अभी तक 426.18 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं।
पहली से आठवीं कक्षा तक लर्निंग इंडिकेटर विकसित करने वाला हिमाचल एक मार्गदर्शक राज्य बनकर उभरा है, और ये अध्ययन सूचक प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2014-15 से कार्यान्वित किये गये हैं। इसके अलावा, प्रदेश प्रारम्भिक स्तर तक सभी बच्चों का बृहद उपलब्धि सर्वेक्षण करने वाला देश का पहला राज्य है। अध्ययन स्थिति का स्कूल स्तर पर जबकि विस्तृत स्तर पर जिला तथा राज्य स्तर पर सर्वेक्षण किया जा रहा है।
कस्तूरबा गान्धी बालिका विद्यालयों और लर्निंग लीडरशिप फांउडेशन पायलट स्कूलों में अध्ययनरत लड़कियों के सशक्तिकरण के लिये विज्ञान, प्रोद्यौगिकी एवं नवीन प्रक्रिया में यथोचित सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। देश के 279 कस्तूरबा गान्धी बालिका विद्यालयों से 22,946 लड़कियों में प्रदेश की तीन लड़कियांे ने उत्कृष्ट स्थान हासिल किया। इन लड़कियों ने राष्ट्रीय विज्ञान केन्द्र संग्रहालय, नई दिल्ली में 7 नवम्बर, 2014 को आयोजित अभिनन्दन समारोह में भाग लिया।
प्रदेश ने सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिये प्रशिक्षण कैलेण्डर विकसित किया है। बैठकों, कार्यशालाओं, फीडबैक, बेसलाईन और माॅनीट्रिंग रिपोर्टस् के आधार पर प्रशिक्षण की आवश्यकता का आंकलन किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान स्कूलों में अध्ययन सत्र को सुनिश्चित बनाकर प्रशिक्षण को पूर्व के मुकाबले अधिक व्यवहारिक बनाया गया है। स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत स्कूलों में ही प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। इस परियोजना के तहत तकनीकी का उपयोग करके अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है।    
अध्ययन के मापदण्डों और स्कूलों में सतत् एवं वृहद मूल्यांकन (सीसीई) के कार्यान्वयन को कारगर बनाने के लिये विषय व कक्षावार आंकलन शीट को विकसित किया गया है। पहली से पांचवी कक्षा तक के पाठ्यक्रम को संशोधित किया गया है। कला शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिये भारतीय ब्रिटिश परिषद् तथा डी.ई.ए.ए एवं एन.सी.ई.आर.टी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में एकीकृत कला अध्ययन कार्यक्रम आरम्भ किया गया है।
प्रथम की भागीदारी से विज्ञान और गणित विषयों के पाठन में स्कूलों को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के अन्तर्गत लाया गया है। इन विषयों के शिक्षण में आईसीटी का उपयोग करने के लिये सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। अप्पर प्राईमरी स्तर पर विज्ञान और गणित विषयों के अध्ययन के उद्देश्य से एक सौ स्कूलों को प्रथम के अन्तर्गत शामिल किया गया है। प्राथमिक पाठशालाओं में पहली कक्षा में प्रवेश की दर को बढ़ाने के लिये मौजूदा प्राथमिक पाठशालाओं के परिसर में ही आंगनवाड़ी केन्द्रों को स्थापित किया जा रहा है।

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