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05/02/2015  
अंबेडकर कॉलेज का चेतना-2015 सम्पन्न
 
 

दिल्ली विश्वविद्यालय के अंबेडकर कॉलेज का दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम चेतना-2015 अपने दर्जनभर सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओं के साथ सम्पन्न हो गया. पिछले साल के मुकाबले अबकी बार दूसरे कॉलेज एवं संस्थानों की मौजूदगी दुगुने से भी ज्यादा रही जिसकी एक बड़ी वजह ऑनलाइन एन्ट्री और सोशल मीडिया के जरिए इससे जुड़ने जैसी सुविधा रही.

पहले दिन की प्रतियोगिताओं, खासकर नुक्कड़ नाटक के जरिए प्रतिभागियों ने किसान आत्महत्या, भारतीय सेना की तकलीफों और लिंग भेद जैसे गंभीर मुद्दे को सामने लाने की कोशिश की वहीं दूसरे दिन फैशन शो और डांस प्रतियोगिता की अलग-अलग कैटेगरी के अन्तर्गत यौन उत्पीड़न और स्त्री हिंसा जैसे सवालों को सामने रखा. आमतौर पर फिल्मी गानों, पाश्चात्य धुनों, कॉस्ट्यूम और भाव-भंगिमा पर आधारित ये विधाएं ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को अपनी ओर खींचते हैं. इन प्रतियोगिताओं में अपेक्षाकृत दर्शकों एवं प्रतिभागियों की संख्या भी ज्यादा हुआ करती हैं. लेकिन थीम आधारित डांस एवं फैशन शो होने के कारण ये प्रतिभागी दर्शकों के बीच गहरा प्रभाव और गंभीर संदेश प्रसारित करने में सफल रहे.

इसी तरह फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में किसी ने अपने चेहरे को उस भारत के नक्शे के रूप में तब्दील कर दिया जो आतंकवाद, घरेलू हिंसा, व्यवस्था की दोहरी नीति जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. इसी कड़ी में दूसरे दिन की मुख्य अतिथि मशहूर कत्थक नृत्यंगना कमालिनी ने कहा कि कला में कशिश होती है जो न सिर्फ संगीत, नृत्य जैसी विधाओं को सुर में रखना सिखाती है बल्कि ये हमारी जिंदगी को भी सुर देती है. हमें चाहिए कि हम इस देश की विरासत को बेसुरा न होने दें.

एकल नृत्य( सोलो डांस) की शहीद भगत सिंह की विजेता रही सैंडल ने बैली डांस के जरिए स्त्री की उन तकलीफों  को उभारा जो अक्सर मीडिया के मुद्दे बनते रहने के बावजूद जमीनी स्तर पर उसी अनुपात में बदलाव हो नहीं पाते. पोस्टर मेकिंग में प्रथम पुरस्कार हासिल करनेवाले देशबंधु कॉलेज के फरहान सलिक ने पोस्टर में जिस समाज को व्यक्त किया, वो वाकई चिंतित करनेवाला है.इसी तरह फेस पेंटिंग प्रतियोगिता में भीमराव अंबेडकर कॉलेज के हेमंत ने चेहरे पर जिस हिन्दुस्तान को उकेरा वो अभी भी आतंकवाद, व्यवस्था की दोहरी नीति और घरेलू समस्याओं से जूझ रहा है.

इस दो दिन तक चलनेवाले सांस्कृतिक उत्सव के संदर्भ में जिसमे कि इग्नू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, एनएसडी सहित दिल्ली विश्वविद्यालय के पच्चीस से भी ज्यादा कॉलेज शामिल हुए, अंबेडकर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जी.के.अरोड़ा का कहना है कि छात्रों की अभिरुचि , अपनी भावनाओं और विचार को व्यक्त करने का तरीका और विधाएं अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन ये देखना बेहद सुखद अनुभव है कि ये बच्चे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझते हैं, देश-दुनिया की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं. चेतना जैसा सांस्कृतिक कार्यक्रम आनेवाले सालों में उन्हें कहीं ज्यादा बेहतर सुविधा और मौके प्रदान करने जा रहा है. चेतना-2015 के संयोजक और अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक संजीव कुमार ने सभी प्रतिभागियों, कॉलेज प्रशासन एवं छात्रों का धन्यवाद देते हुए कहा कि चेतना के सांस्कृतिक कार्यक्रम जहां छात्रों के लिए अपना हुनर दिखाने का मौका हुआ करते हैं, वहीं हम शिक्षकों के लिए नए सिरे से समाज और बदलती पीढ़ी को समझने का बेहतरीन जरिया है।

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