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26/02/2015  
राष्ट्रीय सिंधी भाषा संवर्धन परिषद (एनसीपीएसएल) की बैठक
 
 

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति इरानी की अध्यक्षता में नवगठित राष्ट्रीय सिंधी भाषा संवर्धन परिषद (एनसीपीएसएल) की पहली बैठक हाल में ही नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक में देश भर के सिंधी भाषा और संस्कृति के 21 प्रतिष्ठित विद्वानों ने हिस्सा लिया।

परिषद की बैठक में एनसीपीएसएल के अध्यक्ष के तौर पर श्रीमती इरानी ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। इन फैसलों में निम्‍न शामिल हैं :

1. सिन्‍धी साहित्‍यकारों को उनके आजीवन उत्‍कृष्‍ट योगदान के लिए दिये जाने वाले लाइफ टाइम अचिवमेंट अॅवार्ड (साहित्‍यकार सम्‍मान) की पुरस्‍कार राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रूपाये करना।

2. लाइफ टाइम अचिवमेंट अॅवार्ड (साहित्‍य रचना सम्मान) की पुरस्‍कार राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करना।

3. सिंधी भाषा के क्षेत्र में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए दस प्रतिष्ठित साहित्‍यकारों को दिए जाने वाले साहित्‍य सम्‍मान की पुरस्‍कार राशि को पचास हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करना।

बैठक में अजमेर स्थित महर्षि दयानन्‍द सरस्‍वती विश्‍वविद्यालय में सिंधी चेयर गठित करने के लिए एक करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराने का भी फैसला लिया गया है।

मानव संसाधन मंत्री ने सिंधी भाषा के प्रोत्‍साहन और विकास के लिए कई गतिविधियों की सलाह भी दी। इनमें- (i) सिंधी भाषा में ई-लर्निंग पाठ्यक्रम शुरू करना, जिसके तहत सिंधी भाषा की फाउंडेशन पाठ्यक्रम निशुल्‍क उपलब्‍ध कराना, (ii) युवा और प्रतिभावान सिंधी लेखकों को इस भाषा के प्रोत्‍साहन से जोड़ना और उनकी पुस्‍तकों को नेशनल बुक ट्रस्‍ट द्वारा प्रकाशित कराना, (iii) सिंधी जानने वाले छात्रों के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन करना और इसके तीन विजेताओं को एक इतिहासकार और साहित्‍यकार के दिशानिर्देश में सिंधी भाषा, संस्‍कृति और सभ्‍यता की जड़ों के अध्‍ययन के लिए शोध यात्रा पर ले जाना, (iv) सिंधी भाषी इलाकों में सांस्‍कृतिक क्‍लबों की शुरूआत करना, जहां युवा पीढ़ी नृत्‍य, ना‍ट्य, संगीत, लेखन जैसी गतिविधियों में हिस्‍सा ले सकें, (v) सिंधी भाषा की दुर्लभ पुस्‍तकों को राष्‍ट्रीय ई-पुस्‍तकालय में शामिल करना और इन पुस्‍तकों को नेशनल बुक ट्रस्‍ट द्वारा प्रकाशित कराना - शामिल हैं।

बैठक में स्‍कूलों में चलने वाले सिंधी भाषा की पुस्‍तकों को देवनागरी लिपि के साथ मानकीकरण का कार्य सेंट्रल इंस्‍टीच्‍यूट ऑफ इंडियन लैंग्‍वेजेज (सीआईआईएल) के द्वारा कराये जाने का भी निर्णय लिया गया।

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